Wednesday, 23 August 2017

मोर परिचय दोहा


कोंख जिँकर मैं आय हँव, हवय सुभद्रा नाँव।
हिरउ राम के अंश मैं, परवँ सबो के पाँव।

मुन्ना कहत बुलाय उँन, मनीराम हे नाँव।
शिक्षक हवँ इसकूल मा, मैंअड़हा कवि ताँव।

राज मोर छत्तीसगढ़, जिला बलौदा जान।
मनखे बड़का छोटका, सबके हरवँ मितान।

ममहौना माटी जिहाँ, उपजय चाँदी सोन।
गढ़ सिमगा के गाँव जी, रइथवँ मैं कचलोन।

खाथवँ बासी नून मैं जाथवँ खेती खार।
बेटा हरवँ किसान के, पाथवँ सबके प्यार।

गुरु असीस ला पाय के, सीखत हँव मैं छंद।
अलवा-जलवा हँव लिखत, हाबवँ मैं मतिमंद।

मोर परिचय दोहा


कोंख जिँकर मैं आय हँव, हवय सुभद्रा नाँव।
हिरउ राम के अंश मैं, परवँ सबो के पाँव।

मुन्ना कहत बुलाय उँन, मनीराम हे नाँव।
शिक्षक हवँ इसकूल मा, मैंअड़हा कवि ताँव।

राज मोर छत्तीसगढ़, जिला बलौदा जान।
मनखे बड़का छोटका, सबके हरवँ *मितान*।

ममहौना माटी जिहाँ, उपजय चाँदी सोन।
गढ़ सिमगा के गाँव जी, रइथवँ मैं कचलोन।

खाथवँ बासी नून मैं जाथवँ खेती खार।
बेटा हरवँ किसान के, पाथवँ सबके प्यार।

गुरु असीस ला पाय के, सीखत हँव मैं छंद।
अलवा-जलवा हँव लिखत, हाबवँ मैं मतिमंद।