Tuesday, 7 August 2018

अमृत ध्वनि छंद

1.माता देवी

माता देवी शारदे, करदे वो उजियार।
घेरे हे अज्ञानता, दीप ज्ञान के बार।
दीप ज्ञान के, बार मात वो, सुन ले अरजी।
तम रोथे वो, जब होथे माँ, तोरे मरजी।
हे महतारी, हमन भिखारी, तैं हर दाता।
राह दिखा दे, काम बनादे, शारद माता।

2. महतारी

देखाये जग ला तहीं, अपन कोंख मा लान।

तहीं हरस भगवान वो, आस तहीं सुख खान।

आस तहीं सुख, खान मात वो, हस दुखहारी।

मोर भला तैं, चाहे छिन छिन, हे महतारी।

ज्ञान बताये, सुख डग अँगरी, धर रेंगाये।

होय सकवँ नइ, उरिन कभू माँ, जग देखाये।


3.दरुहा

सुन चकरित खागेवँ मैं, दरुहा मन के गोठ।

कहिँन रोग ले झन डरा, पीबो हम तो पोठ।

पीबो हम तो, पोठ बिकत हे, जब सरकारी।

धरय नही सुन, एकर पीये, एक बिमारी।

मंद हरय जी, कोरोना के, औषध पबरित।

फुटिस नही जी,बक्का मुँह ले,मैं सुन चकरित