1. आजा चन्दा आजा
आजा आजा चन्दा,
अँगना मा तैं टुप ले।
दूध भात धर लाना,
नोनी खाही गुप ले।
बइठे हाबय नोनी,
तोरे करत अगोरा।
खेलत हाबस तैं हा,
बदरा माँ के कोरा।
अँँचरा के ओधा मा,
काबर ग लुकावत हस।
आना आना लउहा,
फोकट ग लजावत हस।
आजा चन्दा आजा,
अँगना मा तैं आजा।
नोनी संग नाचबे,
बजा बजा के बाजा।
मनीराम साहू 'मितान'
2.नाँगर बइला बोर दे
नाँगर बइला बोर दे,
पानी दमोर दे।
करिया करिया बादर।
करत हवन गा आदर।
आ जाना तैं देवता।
देवत हाबन नेवता।
एक घँव तो चिभोर दे।
नाँगर बइला बोर दे
पानी दमोर दे।
करिया करिया बादर।
मूँद दे भरका दाँदर।
हाबय तोर अगोरा।
घाम देत हे फोरा।
झमाझम तैं झोर दे।
नाँगर बइला बोर दे,
पानी दमोर दे।
करिया करिया बादर।
खेत टँगरहा गादर।
बोना हाबय धान गा।
देखत हवय मितान गा।
आके बने दँदोर दे।
नाँगर बइला बोर दे,
पानी दमोर दे।
- मनीराम साहू 'मितान'
3.गुदू गुदू
राँचर ला तैं हेरबे डोकरी,
गाड़ा आवत हे गुदू गुदू।
एमा दार, एमा साग, एमा भात।
खाले नोनी ताते तात।
एमा पेज, एमा पसिया, एमा बोरे।
आना खाले थोरे थोरे।
खाले अँगाकर नइहे बासी,
हँड़िया मा हे खुदू खुदू।
राँचर ला...
एमा दूध, एमा दही, एमा मही।
खा झन सुखवा तहीं तहीं।
एमा चीला, एमा फरा, एमा मुठिया।
खीर घलो हे खाले सुखिया।
अबड़ पदोथच पीये बर तैं,
झन रट नोनी दुदू दुदू।
राँचर ला...
एमा कोहरी, एमा लाटा, हे महेरी।
आना नोनी झन कर देरी।
एमा लाई, एमा मुर्रा हे फुटेना।
पाछू कहुबे महुला देना।
नइ चुरे हे भात अभीकुन,
खाय बर झनकर हुदू हुदू।
राँचर ला...
- मनीराम साहू 'मितान'
4 झुलना के झूल
झुलना के झूल,
कदम के फूल।
झूल नोनी झूल,
झूलना मा झूल।
ददा गये हाबय,
बिने बर मउहा।
लाही तेंदू चार,
दाई भर झँउहा।
हाँस नोनी हाँस,
तैं हा खुल खुल।
झुलना के....
चार चिरौंजी के,
लाड़ू बनाही।
खाबो सबो झन,
बड़ मजा आही।
बनही घलो बहिनी,
भजिया गुलगुल।
झुलना के....
साँझ कुन बहिनी,
ददा जाही हाट।
खेलवना बिसाही,
सुग्घर छाँट छाँट।
लाही पेन कापी,
जाबो इसकुल।
झुलना के....
- मनीराम साहू 'मितान'
[11/8, 11:11 AM] Maniramsahu: फुगड़ी रे फाँय फाँय
फुगड़ी रे फाँय फाँय,
खेलव नोनी साँय साँय।
नोनी तुमन नोनी।
नोहव कोनो पोनी।
हाबव सुका आगर।
हिरदे तुँहर सागर।
होवन देवव झाँय झाँय।
फुगड़ी रे फाँय फाँय,
खेलव नोनी साँय साँय।
सुखिया दुखिया जाना।
हाबव सोला आना।
रइथव सब मा आगू।
पछवा फागू जागू।
करथें ओमन आँय बाँय।
फुगड़ी रे फाँय फाँय,
खेलव नोनी साँय साँय।
- मनीराम साहू 'मितान'
मजा उड़ाबो
--------------
सुखवा दुखवा चैतू बुद्धू,
चलव चलावत गड्डी।
तरिया जाबो डुबक नहाबो,
धरलव कुरता चड्डी।
उथली उथली खेल छुवउला,
करबो मिल के मस्ती।
अबड़ मिठाथे हवय पार मा,
खाबो पिकरी गस्ती।
झुलबो जी हम बर्रइया मा,
निहल निहल हे डारा।
कुदबो चभरँग ले पानी मा,
पारी पारी झारा।
हवय खोखमा तरिया पैठू,
हेर हेर के खाबो।
हवय पार मा डुमर घलो जी,
खाबो मजा उड़ाबो।
-मनीराम साहू 'मितान'
[11/13, 11:04 AM] Maniramsahu: गणित पढ़ाई
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आवव करबो गणित पढ़ाई।
कोन इकाई कोन दहाई।
देखत चिन्ह धन भाग गुना रिन।
जोड़ जोड़बो डाँड़ी गिन गिन।
अंक घटाबो पारी पारी।
ले बर परथे चिटिक उधारी।
पढ़त पाहड़ा गुना बनाबो।
फेर दुसर हम बुद्धि लगबो।
जिनिस बाँटबो भाग बनाबो।
पढ़बो लिखबो भाग जगाबो।
पढे लिखे मा हवय भलाई।
आवव जम्मो बहिनी भाई।
- मनीराम साहू 'मितान'
मुनु बिलई
-----------
मुनु बिलई जी मुनु बिलई।
हाबय कारी मुनु बिलई।
आथे घर मा वो लुक-छुप।
तुरत खुसरथे गोड़ा चुप।
तपथे भारी मुनु बिलई।
मुनु बिलई....
भरे दूध करथे उन्ना।
पी देथे घर पा सुन्ना।
करथे अतलँग मुनु बिलई।
मुनु बिलई....
मुसवा ला बड़ डरवाथे।
कुकुर देख के भग जाथे।
हे तुलमुलही मुनु बिलई।
मुनु बिलई....
- मनीराम साहू 'मितान'
खीस बेंदरा खीस
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खीस बेंदरा खीस।
हरदी मिरचा पीस।
मुँहू हवय गा लाल।
खाथच खूब पताल।
फेकत हस फोकला।
हाबस का भोभला।
अब खाबे गारी मार,
लागत हाबय रीस।
खीस बेंदरा खीस।
हरदी मिरचा पीस।
हमर कोला बारी।
करत हवस उजारी।
लोवा ला झन टोर।
दाँत ला झन खिसोर।
धरे हावँव लवठी,
हावय भर पोरीस।
खीस बेंदरा खीस।
हरदी मिरचा पीस।
हूप हूप तैं करे।
कोनो ला नइ डरे।
जा लउहे भाग तैं।
मोर ले झन लाग तैं।
लाहूँ अपन संगी,
महूँ बुला दस बीस।
खीस बेंदरा खीस।
हरदी मिरचा पीस।
- मनीराम साहू 'मितान'
दे हम ला भगवान तैं
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सुग्घर सुग्घर ज्ञान तैं।
दे हम ला भगवान तैं।
करन भला के काम हम।
लेवन तोरे नाम हम।
सच के रद्दा ला धरन।
गलती कब्भू झन करन।
सतपथ सदगुन खान तैं।
दे हम ला भगवान तैं
आगू लेगन देस ला।
हरन सबो कल्लेस ला।
सुनता के रद्दा चलन।
जुरमिल हम जम्मो रहन।
दया धरम ईमान तैं।
दे हम ला भगवान तैं
सुग्घर होय बिचार हा।
जुरय मया के तार हा।
दुर्गुन हम सब छोड़ दँन।
टुटे छुटे ला जोड़ लँन।
सच्चा मीत-'मितान' तैं।
दे हम ला भगवान तैं।
- मनीराम साहू 'मितान'
घोर घोर रानी
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छत्तीसगढ़ राज,
रइपुर राजधानी।
घोर घोर रानी।
घोर घोर रानी।
धान के कटोरा,
खनिज आनी बानी।
घोर घोर रानी।
घोर घोर रानी।
बड़ मयारू मनखे,
गुरतुर हवय बानी।
घोर घोर रानी।
घोर घोर रानी।
पेरथें ग जाँगर,
करथें किसानी।
घोर घोर रानी।
घोर घोर रानी।
हित मीत जम्मों,
बदे हें मितानी।
घोर घोर रानी।
घोर घोर रानी।
- मनीराम साहू 'मितान'
11/19, 7:26 PM] Maniramsahu:
तपत कुरू
तपत कुरू मिट्ठू, तपत कुरू।
चल इसकुल जाबो सुरू खुरू।
किसम किसम के पाबो ज्ञान।
पढ़ लिख हम बनबो गुनवान।
मार अशिक्षा देबो पाट।
जिनगी के हम गढ़बो बाट।
बसता धर चल हो तइयार।
चल गा चल बनबो बुधियार ।
अपन देश के मान बढ़ाबो।
चल मिट्ठू चल पढ़े ल जाबो।
[11/19, 7:27 PM] Maniramsahu:
तितली आही
सोमू टिक्कू आवव एती।
जावत हव तुम केती केती।
मिल के गोदा फूल लगाबो।
मरय एक झन हमन जगाबो।
खाद डारही गुड्डी रानी।
शुभी पलोही सब मा पानी।
लीली जय करही रखवारी।
दुन्नो मिलके पारी पारी।
रिगबिग ले बड़ गोंंदा फुलही।
आके भौंरा सब मा झुलही।
रंग रंग के तितली आही।
देखत रहिबो मन ला भाही।
[11/19, 7:28 PM] Maniramsahu:
पोथी
सुग्घर बात बताथे पोथी।
सच के ज्ञान कराथे पोथी।
निच्चट घपटे अँधियारी मा,
चक अँजोर बगराथे पोथी।
सबके जिनगी बिपत परे मा,
सँगवारी बन जाथे पोथी।
भूले भटके छुटका बड़का,
सब ला बाट बताथे पोथी।
अज्ञानी सूते मनखे ला,
दे के ज्ञान जगाथे पोथी।
[11/19, 7:30 PM] Maniramsahu:
खेलबो घानीमुन्दी
रइपुर ले वो आवत हे।
पैरी अबड़ सुनावत हे।
कोराये आही चुन्दी।
खेलबो घानीमुन्दी।
दुनो कान सुग्घर बाली।
पहिरे वो कुरती लाली।
होही चुनरी छिटबुन्दी।
खेलबो घानीमुन्दी।
होही दिखत ग चुकचुक ले।
हे गोरी वो फुकफुक ले।
लागत होही फुरफुन्दी।
खेलबो घानीमुन्दी।
करके जी सब तइयारी।
आवत होही सँगवारी।
दुनो बनाबो घरघुन्दी।
खेलबो घानीमुन्दी।
- मनीराम साहू 'मितान'
कुकुर
बन्डू कुकुर बन्डू कुकुर।
देखत रइथे जुगुर-जुगुर।
कालू ओकर नाँव जी।
करथे हाँवे-हाँव जी।
रेंगत रइथे लुहुर-लुहुर।
बन्डू कुकुर बन्डू कुकुर।
खाथे बासी भात ला।
रोटी ताते-तात ला।
जिभिया करथे लुबुर-लुबुर।
बन्डू कुकुर बन्डू कुकुर।
भुँकथे अनचिनहार ला।
रखथे गा घर द्वार ला।
चोर भगाथे सुटुर-सुटुर।
बन्डू कुकुर बन्डू कुकुर।
-मनीराम साहू 'मितान'
[11/25, 2:11 PM] Maniramsahu: केंऊँ मेंऊँ
खेलव रजवा,फगुवा भाऊ।
केंऊँ मेंऊँ,मेकरा के झाऊ।
आवव सुखिया,अतनू अघनू।
फगनी ठगनी जग्गू जगनू।
खेलव मिलके,सँग बलदाऊ।
केंऊँ मेंऊँ,मेकरा के झाऊ।
अपन हथेरी झटकुन देवव।
सूजी काँटा लउहे लेवव।
बइठव खेलव रहव न थाऊ।
केंऊँ मेंऊँ,मेकरा के झाऊ।
धरव कान ला, एक दुसर के।
जेन पुके हव, कोशिश करके।
खेलव सब उतलनहा साऊ
केंऊँ मेंऊँ,मेकरा के झाऊ।
मुँह ले घुरघुर घुर्र बजावव।
हाँसव बोलव चौज मड़ावव।
खेलव कहव न माऊ-माऊ।
केंऊँ मेंऊँ,मेकरा के झाऊ।
- मनीराम साहू 'मितान'
[11/26, 11:52 AM] Maniramsahu: चलव लगाबो पेड़
आवव संगी दल्लू बल्लू,
चलव लगाबो पेड़।
ओन्हा-कोन्हा भाठा-परिया,
अपन खेत के मेड़।
पानी अड़बड़ बरसत हाबय,
लगगे हे चउमास।
इही समे मा पेड़ जागथे,
नइ होवय जर नास।
फेर हमन गा पेड़ लगाके,
देथन खुल्ला छोड़।
टोर-पुदक देथें गरुवा मन,
खूँद-खूँद के गोड़।
पेड़ लगा के हम ला संगी,
बनना हे रखवार।
सबो पेड़ हा जागय सुग्घर,
ले बर परही भार।
- मनीराम साहू 'मितान'
छमछम छमछम छमछम छमछम।
देख बिजुरिया चमचम चमचम।
झूमय नाचय बरखा रानी।
रिमझिम रिमझिम बरसय पानी।
गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़ गड़गड़।
कभू करय जी घड़घड़ घड़घड़।
खूब बजावय रहि-रहि बाजा।
इन्द्र देव बदरा के राजा।
किरकिर किरकिर कुरकुर कुरकुर।
राग मिलाके टरटर टुरटुर।
आनी बानी गीत पुराना
गाँय मेचका झिंगुरा गाना।
मुनिया मुन्नू मटकू मटरू।
पुन्नू पुनिया झुनिया चटरू।
बिछलँय खिसलँय भीज नहावँय।
कूद कूद आनंद मनावँय।
- मनीराम साहू 'मितान'
1. जाड़ा आगे
आगे आगे जाड़ा आगे।
सुघर रौनिया सबला भागे।
साग-पान हे आनी-बानी।
भाटा गोभी कुम्हड़ा चानी।
पालक चौंलाई जुरियागे।
देखव देखव जाड़ा आगे।
दूधफरा चौसेला चीला।
खात हवँय बड़ माई पीला।
तसमई थारी मा परसागे।
देखव देखव जाड़ा आगे।
बोइर बीही हे गदरावत।
मोकइया हे तीर बलावत।
मेला मड़ई घलो भरागे।
देखव देखव जाड़ा आगे।
- मनीराम साहू 'मितान'
2. कोला बारी
देखव देखव कोला बारी।
बोंये हे बूढ़ी महतारी।
तुमा कोंहड़ा खूब फरे हे।
लोवा बतिया नँगत धरे हे।
खीरा अउ बरबट्टी कारी
बोंये हे बूढ़ी महतारी।
मड़वा मा हे सेमी छाये।
खड़े खेड़हा हे कुम्हलाये।
भाँटा घउदे हाबय भारी।
बोंये हे बूढ़ी महतारी।
धनिया मिरचा अउ बंगाला।
लसुन गोंदली भाजी पाला।
आनी-बानी के तरकारी।
बोंये हे बूढ़ी महतारी।
- मनीराम साहू 'मितान'