करमा माई के आरती
जय करमा दाई, जय करमा दाई।
दुख संकट सब पीरा, हर ले तैं माई।1। जय..
करे भक्ति बालापन, श्रीहरि गिरिधर के।
धर्म जोत बगराये, बाती कस जर के।2। जय..
मूँदे आँखी जाने, पति करनी झट तैं।
टोरे तुरत भरम ला, भक्ति भरे घट तैं।3। जय..
रोग धरिस हाथी ला, हरि ले बिनय करे।
तेल कुंड भरवाये, तैलिक बिपत हरे।4। जय..
नारी हित के कारन, जग ले खूब लड़े।
ऊँच नीच मेटे बर, जा सब बीच अँड़े।5। जय..
देइस दरसन तोला, जगन्नाथ स्वामी।
खाइस खिचरी तोरे, हरि अन्तर्यामी।6। जय..
दिये महापरसादे, मनखे ला जग के।
सब ला तहीं सिखोये, सेवा हरि पग के।7। जय..
स्वारथ ला नइ जाने, जग कल्यान करे।
कुल के मान बढ़ाये, भक्ति मसाल धरे।8। जय
करमा माँ के आरति, जे कोनो गावै।
कहय 'मितान' सदा हरि, भक्ति चरन पावै।9। जय..
मनीराम साहू मितान