Tuesday, 20 December 2022

आयुर्वेदिक औषधि अजमोद

*अजमोद*

खंड अ
*सामान्य परिचय*
औषधि आयुर्वेद में, है इस विश्व अनेक।
पर औषधि अजमोद तो, लाखों में है एक।1

भावार्थ- वैसे तो आयुर्वेद में अनेक औषधि हैं परन्तु अजमोद लाखों में एक है।

औषधि ये अजमोद को, कहते वैद्य सुजान।
सभी मानवों के लिए, है ईश्वर वरदान।2

भावार्थ - सभी ज्ञानी वैद्य जनों का कहना है कि अजमोद मनुष्य जाति के लिए ईश्वर का वरदान है।

होता छोटा यह भले, चोखा इसका काम।
भिन्न भिन्न भू क्षेत्र में, भिन्न भिन्न हैं नाम।3

भावार्थ- अजमोद छोटा पौधा अवश्य होता है परन्तु इसका काम बहुत बढ़िया है। इसे अलग अलग क्षेत्र में अलग अलग नाम से जाना जाता है।

अजमोदा चनु अजमुदा, ब्रह्मकुशा अजमोद।
ज्वानु खराश्वा आदि से, पले धरा की गोद।4

भावार्थ- अजमोद इस धरती में चनु, अजमुदा ब्रह्मकुशा, ज्वानु,  खराश्वा आदि नाम से  जाना जाता है।

पीली आभा श्वेत से, होते इसके फूल।
धनिया सा पत्ता दिखे, शलजम जैसा मूल।5

भावार्थ- इसके फूल पीले चमक लिए हुए सफेद होते हैं। इसके पत्ते धनिया के समान दिखाई देते हैं तथा इसकी जड़े शलजम जैसी होती हैं।

पौधा ये दो वर्ष का,  सुघड़ हरा सा रूप।
थोड़ा थोड़ा चाहता, जल जाड़ा अरु धूप।6

भावार्थ- यह द्विर्षीय पौधा  सुन्दर हरे रंग का होता है। इसको उगने के लिए पानी के साथ थोड़ा ठंड और धूप की आवश्यकता होती है।

उगे हिमालय क्षेत्र के, पश्चिम ठंड प्रदेश।
भारत के पंजाब अरु, सुन्दर फारस देश।7

भावार्थ- अजमोद हिमालय के पश्चिम ठंड प्रदेश, पंजाब और फारस देश में उगाया जाता है।

जानें औषधि रूप में, इसे धरा के लोग।
शाक मसाले सूप में, करते भी उपयोग।8

भावार्थ- इसे लोग औषधि के साथ साथ सब्जी और सूप के रूप मेंं प्रयोग करते हैं।

खाते हैं कुछ लोग तो, इसको बना सलाद।
तीखा तीखा चरपरा, होता इसका स्वाद।9

भावार्थ- कुछ लोग इसे सलाद के रूप में भी प्रयोग करते हैं। इसका स्वाद तीखा चरपरा  होता है।

पौधा ये अजमोद के, जड़ पत्ता अरु बीज।
बहुत व्याधियों के लिए, है उपयोगी चीज।10

भावार्थ- अजमोद के जड़ पत्ता और बीज बहुत सारी बीमारियों के लिए उपयोगी है।

रहता है अजमोद में, खनिज तत्व भरपूर।
सेवन हो यदि नित्य तो, भगे व्याधियाँ दूर।11

भावार्थ- अजमोद में खनिज तत्व भरपूर मात्रा में पाया जाता इसके सेवन से बहुत रोगों का नाश होता है।

लड़ने में ये रोग से, बहुत बड़ा है वीर।
तत्व विषैला भागता, थमता नहीं शरीर।12

भावार्थ- अजमोद रोगों से लड़ने में बहुत ही असरकारक औषधि है। इसके सेवन से शरीर के विषैले तत्व दूर हो जाते हैं।

भोजन‌ में शामिल करे, जो कोई अजमोद।
सदा सदा वो हर्ष का, अंतस रखे पयोद।13

भावार्थ- जो व्यक्ति अपने भोजन में अजमोद को शामिल करता है वह हमेशा अपने जीवन में खुशी का अनुभव करता है।

*अजमोद का सामान्य उपयोग*
अजमोदा गुण से भरा, है जी दवा महान।
दुश्मन बहुतों रोग का, इससे ना कुछ हान।14

भावार्थ- अजमोद गुणकारी और महान औषधि है, जो रोगों से लड़ने में सक्षम है और इससे हानि कुछ भी नही होती।

बेचैनी मस्तिष्क से, पहुँचे यदि नुकसान।
काढ़ा इसके मूल का, करता तुरत निदान।15

भावार्थ- मस्तिष्क की बेचैनी होने पर अजमोद के जड़ का काढ़ा लेनें से शीघ्र उपचार होता है।

पीयें यदि हम एक कप, प्रतिदिन जैसे चाय।
सोच समझ की शक्ति सँग, तर्क शक्ति बढ़ जाय।16

भावार्थ- अजमोद के काढ़े प्रतिदिन चाय के समान एक कप पीने से सोच समझ की शक्ति के साथ-साथ तर्क शक्ति भी बढ़ जाती है।

लेये कोई चूर्ण को, दिन में यदि दो बार।
कहें वैद्य जी साँस के, भागे सभी विकार।17

भावार्थ-  वैद्य जनों का कहना है कि अजमोद के चूर्ण को दिन मे दो बार लेने से साँस सम्बन्धी सभी विकार दूर हो जाते हैं।

बच्चों के गूदे कहीं, कृमि छीने आराम।
लेप पेट में बीज के, कर दे काम तमाम।18

भावार्थ- अजमोद के बीज का लेप पेट में करने से बच्चों के गूदे में लगे कृमि दूर हो जाते हैं।

असहनीय यदि पीर हो, तन में किसी प्रकार।
हरते इसके चूर्ण जड़, पीये से कुछ बार।19

भावार्थ- अजमोद की जड़ चूर्ण का काढ़ा शरीर में किसी भी प्रकार के दर्द को दूर कर देता है।

गुर्दे के पथरी जमें, तन को कहीं सताय।
सेवन से अजमोद के, झट कटके गिर जाय20

भावार्थ- अजमोद के सेवन करने से गुर्दे की पथरी
शीघ्र ही कट कर गिर जाती है।

सूजन कुछ यदि हो हृदय, या तन कोई भाग।
पीते ही जड़ चूर्ण को, भागे तन को त्याग।21

भावार्थ- अजमोद के जड़ का चूर्ण का काढ़ा, हृदय या शरीर के किसी भी भाग के सूजन को दूर कर देता है।

कटे फटे से अंग से, बहे लहू की धार।
ऐसे रोगों को करे, अजमोदा नि:सार।22

भावार्थ- शरीर के कोई भाग यदि कटा फटा है और उसमें से रक्त की धार बह रही हो तो अजमोद इसे रोक देता है।

बढ़े रक्त की शर्करा, या फिर तन का भार।
अजमोदा के पास है, इसका भी उपचार।23

भावार्थ- खून में बढ़े हुए शक्कर हो या फिर शरीर का भार अधिक बढ़ा हुआ हो, इसके लिए भी अजमोद एक कारगर दवा है।

बढ़े अनावश्यक रूप से, तन का कोलेस्ट्राल।
इसमें भी अजमोद ये, करता खूब कमाल।24

भावार्थ- अजमोद शरीर में बढ़े हुए अनावश्यक कोलेस्ट्रॉल को भी दूर करता है।

हो जाये जी देह का, रक्त चाप यदि उच्च।
गुणकारी अजमोद है, इसको करे अनुच्च।25

भावार्थ-  अजमोद एक ऐसी गुणकारी औषधि है जो बढ़े हुए रक्तचाप को कम कर देता है।

रोग हमारे नेत्र का, दूर करे जो खास।
ऐसे ऐसे तत्व‌ हैं, अजमोदे के पास।26

भावार्थ- अजमोद में ऐसे भी तत्व मौजूद होते हैं जो नेत्र सम्बनधी रोगों को दूर कर देते हैं।

कारण जड़ कमजोर से, झड़ते हों यदि बाल।
अजमोदा इसके लिए, है जी दवा कमाल।27

भावार्थ- जड़ों में कमजोरी की वजह से कहीं बाल झड़ रहे हों, तो इसके लिए भी अजमोद एक गुणकारी औषधि है।

गुणकारी अजमोद है, कहते वैद्य सुजान।
नित प्रयोग से ये रखे, कानों का भी ध्यान।28

भावार्थ- अजमोद एक ऐसी गुणकारी दवा है जिसके प्रतिदिन सेवन से हमारे कानों से सम्बन्धित रोग दूर हो जाते हैं।

दाँत मसूड़े दर्द का, करना हो यदि अन्त।
भुने बीज को पीसकर, मलिए दाँत तुरन्त।29

भावार्थ-  दाँत मसूड़े में यदि दर्द हो रहे हों तो अजमोद के भूने हुए बीज को दाँत में मलने से दर्द ठीक हो जाता है।

यदि भोजन के बाद में, हो न हिचकियाँ बंद।
अजमोदे को चूसिए, लेकर दाने चंद।30

भावार्थ- भोजन करने के बाद यदि हिचकियाँ बंद नही हो रहे हों, ऐसे में अजमोद के बीज के कुछ दाने लेकर चूसने से हिचकियाँ रुक जाती हैं।

बवासीर मस्से कहीं, शौच काल दे कष्ट।
गर्म बीज से सेंकिए, कहें वैद जी स्पष्ट।31

भावार्थ- शौच के समय बवासीर के मस्से में पीड़ा होती हों ऐसे में अजमोद के बीज को साफ कपड़े में बाँध गरम करके सेंकने से आराम मिलता है।

खाने में अजमोद का, करते रहें प्रयोग।
वजन घटाने में सदा, करता है सहयोग।32

भावार्थ- भोजन में अजमोद को शामिल करना चाहिए। यह शरीर के वजन घटाने में सहायता करता है।

सेवन इसका कीजिए, नित नित सुबहो शाम।
अस्थि रोग में भी बहुत, करता है ये काम।33

भावार्थ- अजमोद का प्रतिदिन सुबह शाम सेवन करने से हड्डी सम्बन्धी रोगों में लाभ होता है।

*भाग ब*
*(अजमोद के साथ अन्य मिश्रण)*

*गला बैठने में*
गला बैठ जाये कहीं, निकले ना आवाज।
अजमोदे के पास है, इसका सही इलाज।34

भावार्थ- गला बैठ गया हो और आवाज ठीक से नहीं निकल रही हो तो अजमोद से इसका उपचार किया जा सकता है।

यवक्षार अजमोद के, ले लें काढा़ सार।
घी से लें बढ़िया पका, पी लें दिन कुछ बार।35

भावार्थ- गले के बैठने के विकार के लिए यवक्षार और अजमोद के काढ़े को घी के साथ अच्छे से पकाकर दिन में कुछ बार पीने से आराम मिलता है।

तीन ग्राम अजमोद को, ले लें नीर उबाल।
होने दे कुछ ताप कम, सेंधु नमक दे डाल।36

भावार्थ- अजमोद के तीन ग्राम बीज को पानी में उबालें और कुछ ठंडा होने पर उसमें सेंधा नमक डाल दें।

लें अब ये जल गुनगुना, कर कुल्ला कुछ बार।
करे गरारे से भगे, सारे कंठ विकार।37

भावार्थ- इस उबले गुनगुने जल से कुल्ला करने या गरारे करने से गले सम्बनधी सारे विकार दूर हो जाते हैं।

*सूखी खाँसी में*
सूखी खाँसी रात-दिन, देती हो यदि कष्ट,
बनी दवा अजमोद की, करता इसको नष्ट।38

भावार्थ- सूखी खाँसी को भी अजमोद से बनी दवा
समाप्त कर देती है।

अजमोदे के साथ में , ले लें पत्ते पान।
रहें चूसते मुँह दबा, लें खाँसी के प्रान।39

भावार्थ- अजमोद के बीज को पान के पत्ते के साथ मुँह में दबाकर चूसते रहने से सूखी खाँसी दूर होती है।

दम फूले यदि आपका, मिले चैन ना पूर्ण।
शहद मिलाकर चाटिए, अजमोदे का चूर्ण।40

भावार्थ- अजमोद के चूर्ण को शहद मिलाकर चाटने से दम फूलने की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

*भूख न लगना*
लगे भरा सा पेट यदि, लगती ना हो भूख।
अजमोदे इसके लिए, बनती दवा पियूख।41

भावार्थ- पेट भरा-भरा सा लगे और भूख न लगती हो इसके लिए अजमोद अमृत समान औषधि है।

अजमोदे अरु पिप्पली, मिलकर करते काम।
काढ़ा इनके पीजिए, नित नित सुबहो शाम।42

भावार्थ-  अजमोद और पिप्पली का काढ़ा सुबह शाम लेने से भूख न लगने की समस्या दूर होती है।

ये दोनों के चूर्ण भी, लेये क्षुधा बढ़ाय।
करे देह को पुष्ट अरु, अन्य रोग मिट जाय।43

भावार्थ- अजमोद और पिप्पली के चूर्ण लेने से भूख न लगने  की समस्या दूर होने के साथ शरीर भी बलवान बनता है।

*गैस में*
कहीं उदर अति गैस बढ़, देता हो तन पीर।
रहते ये अजमोद के, होवें नहीं अधीर।44

भावार्थ-  पेट के गैस की समस्या से धैर्य खोने की आश्यकता नही है, अजमोद इसका भी उपचार करता है।

अजमोदे को पीसिए, सोठ पिप्पली संग।
थोड़ी काली मिर्च मिल, दिखलायेंगे रंग।45

भावार्थ-  अजमोद, सोठ, पिप्पली और थोड़ी काली मिर्च पेट में गैस की समस्या को दूर कर देते हैं।

लेवें मिश्रित चूर्ण ये, ग्राम दुई से चार।
बढ़े पेट के गैस का, है बढ़िया उपचार।46

भावार्थ- अजमोद, सोठ, पिप्पली और काली मिर्च, ये सभी के चूर्ण दो से चार ग्राम लेने से पेट में गैस
की समस्या से आराम मिलता है।

*आफरे में*
हो जाये यदि आफरा, छिने चैन आराम।
अजमोदे के के बीज का, चूर्ण बना दो ग्राम।47

भावार्थ- अजीर्ण होने या पेट फूलने की समस्या में   अजमोद के बीज का दो ग्राम चूर्ण लेना चाहिए।

झट इसको गुड़ फेंटकर, मसल बना लें गोल।
ले लें सँग जल गुनगुने, औषधि ये अनमोल।48

भावार्थ- अजमोद के दो ग्राम चूर्ण को गुड़ के साथ फेंटकर इसकी गोली बना लें और इसे गुनगुने जल के साथ लेने से आफरे की समस्या दूर होती है।

*पतले दस्त में*
पेट मरोड़े खूब अरु, होवे पतले दस्त।
औषधि ये अजमोद तो, कर दे इनको पस्त।49

भावार्थ-  पेट में मरोड़ के साथ यदि पतले दस्त होते हों तो अजमोद से इस समस्या से निजात पाया जा सकता है।

मिश्री मधु अजमोद सँग, पीस क्टंग बारीक।
साथ मुलेठी चूर्ण हो, सभी मिला लें ठीक।50

भावार्थ- मरोड़ के साथ पतले दस्त की समस्या में अजमोद के साथ क्टंग और मुलेठी के चूर्ण को अच्छी तरह मिला लें।

पीयें इनको दूध सँग, घी डालें कुछ ग्राम।
बढ़ते पेचिश दर्द से, पायें झट आराम।51

भावार्थ- इस मिश्रित चूर्ण में कुछ ग्राम घी मिलाकर दूध‌ के साथ सेवन करने से पेट मरोड़ के साथ पेचिश में आराम मिलता है।

पाठा अजमोदा कुटज, नीलकमल अरु सोंठ।
लिये साथ में पिप्पली, भरें हँसी मिल होंठ।52

भावार्थ- अजमोद के साथ पाठा, कुटज, नीलकमल, सोठ और पिप्पली ये सभी मिलकर पतले दस्त का उपचार करते हैं।

ये सारे के चूर्ण लें, ग्राम दुई से चार।
सँग हो पानी गुनगुने, करे बंद अतिसार।53

भावार्थ- अजमोद के साथ पाठा, कुटज, नीलकमल, सोठ और पिप्पली, ये सभी के दो से चार ग्राम चूर्ण को गुनगुने पानी के साथ सेवन‌ करने से अतिसार बंद हो जाता है।

अजमोदे सँग मोचरस, सोंठ धाय का फूल।
ले लेवें सम भाग में, जाँय नहीं कुछ भूल।54

भावार्थ- अजमोद, मोचरस, सोठ धाय का फूल ये सभी बराबर मात्रा में लेना है।

मिला सभी को पीस कर, पियें छाछ के संग।
भगे रोग अतिसार झट, करे बिना वो तंग।47

भावार्थ- अजमोद, मोचरस, सोठ धाय का फूल को बराबर मात्रा में लें और इन सभी को पीसकर छाछ के साथ सेवन करने से अतिसार रोग दूर हो जाता है।

*उल्टी में*
लौंग पीसकर चाँटिये, अजमोदा मधु संग।
बार बार उलटी लगे, करे चैन जब भंग।55

भावार्थ- अजमोद और लौंग को पीसकर शहद के साथ चाटने से उल्टी बंद हो जाती है।

पेट दर्द में
कहीं पेट में दर्द हो, ऐंठन खूब सताय।
औषधि ये अजमोद को, भूल नहीं हम जाँय।56

भावार्थ- ऐंठन के साथ पेट के दर्द में अजमोद को हमें नही भूलना चाहिए।

तीन ग्राम अजमोद ले, लायें काला नून।
पियें संग जल गुनगुने, पायें चैन शुकून।57

भावार्थ- तीन ग्राम अजमोद में काला नमक मिलाकर गुनगुने जल के साथ सेवन करने से पेट के ऐंठन के साथ दर्द में भी लाभ होता है।

एक ग्राम अजमोद का, चूर्ण सुबह अरु शाम।
पिये गरम जल सँग मिटे, पेट दर्द का नाम।58

भावार्थ-  एक ग्राम अजमोद का चूर्ण गुनगुने जल के साथ सुबह और शाम सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है।

गुणकारी होता अधिक, अजमोदे का तेल।
एक ग्राम जब सोंठ सँग, होवे इसका मेल।59

भावार्थ- अजमोद के बीज का तेल भी गुणकारी हो जाता है जब अजमोद के तेल को एक ग्राम सोठ के साथ मिला देतें है।

करे पेट यदि दर्द तो, होवें नहीं अधीर।
झट से ले लेवें इसे, साथ गुनगुने नीर।60

भावार्थ- अजमोद के बीज के तेल को एक ग्राम सोठ के साथ मिलाकर गुनगुने जल के साथ सेवन करने से पेट दर्द में लाभ होता है।

*मूत्र जलन में*
जलन मूत्र में हो कहीं, छिने चैन आराम।
अजमोदे के चूर्ण को, ले लेवें कुछ ग्राम।61

भावार्थ- अजमोद के बीज का कुछ ग्राम चूर्ण सेवन कर मूत्र जलन का उपचार किया जा सकता है।

जल के सँग में लें इसे, प्रतिदिन सुबहो शाम।
मूत्र रोग का देह से , मिट जायेगा नाम।62

भावार्थ- अजमोद के बीज के कुछ ग्राम चूर्ण को जल के साथ प्रतिदिन सेवन करने से मूत्र जलन का रोग दूर हो जाता है।

*मूत्राशय दर्द में*
कारण में यदि गैस के, मूत्राशय हो पीर।
रहते ये अजमोद के, होवे नहीं अधीर।63

भावार्थ - पेट में गैस के कारण यदि मूत्राशय में दर्द होता हो तो इसमें भी अजमोद का उपचार लिया जा सकता है।

अजमोदे के बीज को, बाँध नमक के संग।
सेकें पेडू को तुरत, दिखलायेंगे रंग।64

भावार्थ-  अजमोद के बीज को नमक के साथ बाँधकर पेडू को सेकने से मूत्राशय के पीड़ा में लाभ होता है।

अजमोदे अरु सोंठ को, लेवें पीस महीन।
मात्रा लेना है सखा, ग्राम दुई से तीन।65

भावार्थ- अजमोद और सोंठ को बारीक पीसकर दो से तीन ग्राम सेवन करने से पेडू के दर्द में आराम मिलता है।

*सूजन और गठिया में*
मिश्रित कर सँग गुड़ जुना, दिन में लें दो बार।
सूजन गठिया दर्द का, अजमोदा उपचार।66

भावार्थ- अजमोद को पुराने गुड़ के साथ दिन में दो बार सेवन करने से सूजन और गठिया रोग दूर होता है।

*वात रोग में*
पीठ जाँघ में दर्द जो, देह बढ़ाये कष्ट।
सारे वात विकार भी, करता है ये नष्ट।67

भावार्थ- वात विकार के कारण पीठ और जाँघ में दर्द होते हों तो इसके लिए भी अजमोद ऐसी औषधि है जो दर्द को दूर कर देता है।

छोटी पीपल सोंठ सँग, रसना सौंफ गिलोय।
अश्वगंध अजमोद अरु, शतावरी भी होय।68

भावार्थ- अजमोद, छोटी पीपल, सोंठ,रसना, सौफ, गिलोय, अश्वगंधा और शतावरी ये सभी को लेना है।

ये आठों सम भाग में, कूट बना‌वें चूर्ण।
छूट कहीं इक जाय तो, होय न औषधि पूर्ण।69

भावार्थ- वात रोग के लिए अजमोद, छोटी पीपल, सोंठ,रसना, सौफ, गिलोय, अश्वगंधा और शतावरी ये सभी को बराबर भाग में लेकर चूर्ण बनाना है।

डेढ़ ग्राम लें चूर्ण अब, सँग घी के दस ग्राम।
सूजन वात विकार से, देगा ये आराम।70

भावार्थ- वात रोग के में अजमोद, छोटी पीपल, सोंठ, रसना, सौफ, गिलोय, अश्वगंधा और शतावरी ये सभी को बराबर भाग में लेकर, चूर्ण बनाकर डेढ़ ग्राम को दस ग्राम घी के साथ सेवन करने से लाभ होता है।

दिन में ऐसा आपको, लेना है दो बार।
कुछ दिन लेते ही रहें, ये सुन्दर उपचार।71

भावार्थ- कुछ दिनों तक इस औषधि को दिन में दो बार लेते रहना है। यह वात विकार का सुन्दर उपचार है।

*सूजन एवं शरीर के दर्द में*
लावें जड़ अजमोद के, लें दस पन्द्रह ग्राम।
पी लेवें कढ़ा बना, दवा बाण ये राम।72

भावार्थ-  अजमोद की जड़ो का दस से पंद्रह ग्राम जड़ का काढ़ा सूजन एवं शरीर के दर्द के लिए रामबाण औषधि है।

या लेवें जड़ चूर्ण को, ग्राम दुई से चार।
सूजन दर्द शरीर का, करता ये उपचार।73

भावार्थ- दो से चार ग्राम अजमोद की जड़ो का चूर्ण लेने से सूजन एवं शरीर के दर्द में लाभ होता है।

*शीतपित्त और कोढ़ में*
शीतपित्त हो जाय या, होय कोढ़ का रोग।
इसमें भी अजमोद का, होता है उपयोग।74

भावार्थ- शीतपित्त और कोढ़ जैसे रोगों में भी अजमोद का सेवन किया जाता है।

लेवें इसके चूर्ण को, ग्राम दुई से पाँच।
गुणकारी गुड़ साथ हो, कहें वैद्य जी साँच।75

भावार्थ- वैद्य जनों का स्पष्ट  कहना है कि दो से पाँच ग्राम अजमोद के बीज का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करने से शीतपित्त और कोढ़ में लाभ होता है।

सेवन जब होता रहे, भोजन हो उपयुक्त।
रोगी वस्त्र निवास भी, मैल धूल से मुक्त।76

भावार्थ- अजमोद के बीज का चूर्ण गुड़ के साथ सेवन करने के काल में भोजन उपयुक्त मात्रा में लेना है। रोगी के कपड़े तथा निवास भी स्वच्छ होना चाहिए।

*कच्चे फोड़े में*
कच्चा फोड़ा हो कहीं, तन में किसी प्रकार।
इसका भी अजमोद से, होता है उपचार।77

भावार्थ- शरीर के किसी भी माग में यदि फोड़ा हो जाय और वह कच्चा हो तो इसमें भी अजमोद का उपचार लिया जा सकता है।

गुड़ के सँँग अजमोद का, कर देवें जी मेल।
पीसें अरु लेवें पका, लेकर सरसों तेल।78

भावार्थ-  कच्चे फोड़े के लिए गुड़ और अजमोद को साथ लेकर पीसना है और सरसों के तेल में पकाना है।

कच्चा फोड़ा है जहाँ, बाँध इसे दें आप।
फोड़े को झट से पका, दूर करेगा ताप।79

भावार्थ-  पके हुए लेप को कच्चे फोड़े के ऊपर बाँधने से कच्चे फोड़े को जल्दी पककर फूट जाता है जिससे फोड़े का जलन कम होता है।

*रक्त स्राव में*
रक्त बहे यदि घाव से, होते ना हों बंद।
जिसके कारण आपका, छिने चैन आनंद।80

भावार्थ- शरीर के किसी भी भाग में बने घाव‌ से यदि रक्त का बहना बंद न हो रहा हो इसमें भी अजमोद का उपचार लिया जा सकता है।

अजमोदे का चूर्ण लें, ग्राम एक से चार।
बहना झट रुक जायगा, भटके ना बेकार।81

भावार्थ- अजमोद के चूर्ण को एक से चार ग्राम की मात्रा में सेवन से रक्त का बहना‌ रुक जाता है।

*ज्वर में*
देह तपे यदि खूब अरु, उतरे नहीं बुखार।
अजमोदे के बीज को, लावें जा बाजार।82

भावार्थ- बुखार में भी अजमोद के बीज को औषधि के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।

चार ग्राम अजमोद को, प्रतिदिन प्रातः आप।
ठंडे जल से लें निगल, गिर जायेगा ताप।83

भावार्थ- चार ग्राम अजमोद के चूर्ण को प्रतिदिन ठंडे जल के साथ निगलने से बुखार समाप्त हो जाता है।

*बच्चों के गूदे की कृमि में*
कीड़े बच्चों के गुदे, लग करते हों तंग।
अजमोदा ही जीतता, लड़कर इनसे जंग।84

भावार्थ- बच्चों के गूदे में यदि कृमि लग गई हों तब भी अजमोद से उपचार किया जा सकता है।

अजमोदे के बीज को, उपल आग दें डाल।
निकलेगा इससे धुआँ, जो है कृमि का काल।85

भावार्थ- अजमोद के बीज को उपल की आग में डालें,  इससे निकलने वाले धुएँ को गूदे की तरफ जाने दें इससे कृमि नष्ट हो जायेंगे।

या अजमोदे बीज को, पीसें हम बारीक।
गुदे लगा दें चूर्ण को, कर देगा सब ठीक।86

भावार्थ- अजमोद के बीज को बारीक पीसकर गूदे में लगाने से भी कृमि मर जाते हैं।

*अजमोद से हानि किसे *
औषधि आयुर्वेद से, तनिक नही नुकसान।
आते हैं कम ही समय, होवे इनसे हान।87

भावार्थ- आयुर्वेदिक औषधियों से शरीर को नुकसान नही होता। कम ही समय आते हैं जब इनसे नुकसान होते हैं।

फिर भी सेवन जब करें, औषधि ये अजमोद।
मानें वैद्य सलाह को, पायें खुशी पयोद।88

भावार्थ - अजमोद के सेवन करने से पहले वैद्य की सलाह अवश्य मानना चाहिए।

नाप तौल मे लीजिए, अजमोदे को आप।
बिना तौल से आपका, बढ़ सकता है ताप।89

भावार्थ - अजमोद को वैद्य के बताये हुए माप में लेना चाहिए। ऐसा नहीं करने से तकलीफ का सामना करना पड़ सकता है।

काढ़ा सेवन जब करें, रोग शमन को आप।
रहे मिली दस बीस में, बढ़िया इसका नाप।90

भावार्थ - किसी भी रोग में हो अजमोद के काढ़े का सेवन दस से बीस मिली ग्राम से अधिक नही होना चाहिए।

अदमोदे का चूर्ण भी, ग्राम दुई से पाँच।
वैद्य राय से लीजिए, आयेगी ना आँच।91

भावार्थ -  किसी भी रोग में अजमोद के चूर्ण का सेवन दो से पाँच ग्राम के मध्य होना चाहिए।

किसको इससे है नफा, किसको है नुकसान।
ये भी जानें हम सभी, रहें नहीं अनजान।92

भावार्थ - अजमोद की बनी औषधियों से किन व्यक्तियों को लाभ और किन व्यक्तियों को हानि हो सकती है इसका भी ज्ञान होना आवश्यक है।

औषधि लेने से कहीं, होवे खुजली अंग।
चकता चकता लाल या, दिखे दाग बदरंग।93

भावार्थ- अजमोद से बनी औषधि लेने के पश्चात यदि शरीर में खुजली होवे या चमड़ी में लाल चकता धब्बा दिखे तब इसका सेवन नहीं करना चाहिए।

निश्चित माने देह को, दवा नहीं स्वीकार।
जानें उस तन के लिए, अजमोदा बेकार।95

भावार्थ- अजमोद से बनी औषधि लेने के पश्चात यदि किसी व्यक्ति के शरीर में खुजली होवे या चमड़ी में लाल चकता धब्बा दिखे तब यह जान लें कि दवा उस व्यक्ति के लिए उचित नही है।

तुरत दिखायें वैद्य को, चुप बैठे ना आप।
हो सकता है बाद में, ज्यादा पश्चाताप।95

भावार्थ - अजमोद सेवन से यदि शरीर को किसी भी प्रकार से नुकसान हो रहा हो तो वैद्य को अवश्य दिखाना चाहिए अन्यथा बाद में पछताना पड़ सकता हहै।

रक्त चाप यदि है गिरा, करें न सेवन आप।
ऐसे में देगा बढ़ा, तन में अति संताप।96

भावार्थ - जिस व्यक्ति का रक्त चाप कम हो उसे अजमोद की बनी औषधियों का सेवन नहीं करना चाहिए।

मिरगी पीड़ित व्यक्ति भी, करें न कभी प्रयोग।
इसके सेवन से सखा, बढ़ सकता है रोग।97

भावार्थ - मिरगी पीड़ित व्यक्ति को भी अजमोद की बनी औषधियों का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे उसका रोग और अधिक बढ़ सकता है।

इससे रहना चाहिए, गर्भवती को दूर।
अजमोदा इनके लिए, हो सकता क्रूर।98

भावार्थ - अजमोद का स्वभाव गर्म होता है अत: इससे बनी औषधियों का सेवन गर्भवती स्त्रियों को भी नहीं करना चाहिए।

अजमोदे ना लें कभी, रोग ग्रस्त गंभीर।
सेवन से जी देह में, बढ़ सकता है पीर।99

भावार्थ - गंभीर रोगों से ग्रस्त व्यक्तियों को भी अजमोद का सेवन नही करना चाहिए, इससे हानि हो सकती है।

अजमोदे का जान लें, है जी गरम स्वभाव।
हो सकता है वक्ष में, इसका बुरा प्रभाव।100

भावार्थ - यह भी जानना आवश्यक है कि अजमोद का स्वभाव गर्म होता है इसके सेवन से सीने में जलन भी हो सकती है।

दोहे में जो लिख सके, वैद्य जनों‌ की बात
अनपढ़ मूर्ख‌ 'मितान' में, इतनी ना औकात।101

भावार्थ- मितान कवि कहते हैं कि औषधि सम्बंधित वैद्य जनों के विशाल ज्ञान के भंडार को दोहे में पिरोना मुझ अज्ञानी के लिए संभव नहीं है।

- मनीराम साहू 'मितान'
कचलोन (सिमगा)
जिला -बलौदाबाजार-भाटापारा
छत्तीसगढ़ 493101