बरवै छंद
जप लव संगी जम्मो, प्रभु श्री राम।
पार लगइया पावन, ओकर नाम।
महिमा हवय नाम के, अपरम्पार।
पबरित अढ़ई आखर, देथे तार।
जपे रहिस शबरी हा,निसदिन राम।
पाय रहिस सुग्घर वो, प्रभु के धाम।
केंवट राखिस हिरदे,प्रभु बइठार।
बनिस सिया पतिओकर, खेवनहार।
तरगे रहिस विभीषण,करके जाप।
कटे रहिस रावन के,जम्मो पाप।
तरिस घलो ले वाल्मिकि, उल्टा नाम।
मरा मरा करके वो, पाइस राम।