कज्जल छंद
करले संगी लहू दान।
मिलही नँगते पुन्य जान।
अबड़े होही तोर मान।
बात मान गा तैं मितान।
मन मा बइठे डर निकाल।
भरम रोग झन पोस पाल।
नइ बिगड़य गा तोर हाल।
लगय नही अउ देख भाल।
थोकन तो ले तैं बिचार।
हिरदे ला गा अपन झार।
साफ रही तन लहू धार।
परच नही तैं झट बिमार
झन बतिया गा तीन पाँच।
सच काहत हँव बात जाँच।
जाही ककरो जीव बाँच।
नइ आवय तन चिटिक आँच।
मनीराम साहू 'मितान'
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