सखि छन्द
सुन ले गा गंगा बारू। छोड़ पिये बर तैं दारू।
तोर पिये के ये जोखा। कर देही तोला खोखा।
बेंच डरे हस बारी ला। हंडा हँउला थारी ला।
नइ बाँचिस गा बिजहा हा। धरवट लुगरा तिजहा हा।
दुख मा हें लइका बाई।बुढ़वा तोर ददा दाई।
चेत कहाँ हाबय तोला। किंजरे जस मौनी भोला।
दिखथच भट्ठी जाते तैं।रइथच दिन भर माते तैं।
दिन हे अभी किसानी के। खातू माटी पानी के।
नाँगर रीता हे माढ़े। बइला हें ठलहा ठाढ़े।
ताकत हवय तुतारी हा।जोहय बाट कुदारी हा।
चूहत हाबय छानी हा।खुसरत हे घर पानी हा।
खपरा जम्मो फूटे हे। काँड़ घलो हा टूटे हे।
परे हवय सुन पैरा गा। होगे हस का भैरा गा।
नइ तो बँधे झिपारी हे। ना कोनो तइयारी हे।
परदा बिना पलानी के। घर हे बिना सियानी के।
गुन इन बँचही कइसे जी।करबे तैं हा अइसे जी।
चरदिनिया जिनगानी के।रखले लाज मितानी के।
हर ले सब करलाई तैं। छोड़ नशा ला भाई तैं ।
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