Sunday, 24 September 2017

मितान के बिनती

😃मितान के बिनती😀

गनपति महराज हो काबर,
नइ होवव ककरो बर करू।
जइसने तुहँर ददा हे भोला,
तइसने तहूँ मन निच्चट सरू।

तुहँर भगत मन होगे हें उलम्मा,
तुमन थोरको नइ खिसियावव।
कलेचुप बइठे रइथव आसन म,
काबर तुमन नइ गुसियावव।

तुहँर नाव के आड़ म ओमन,
नंगतेच के पइसा बरारथे।
तुमन ल भुलवारथे लाड़ू म,
ओमन आनी-बानी के झाड़थे।

खरचा करही पचास रूपिया के,
लिखे के बेर एक ठन शून्य बढ़ाथे।
तुहँर ददा के नाव ले-ले के,
ओमन रहि-रहि चिलम चढ़ाथे।

संझा होथे तहाँ ले अद्धी पउव्वा,
जम्मो भगत एक जगा जुरथे।
तुमन ल जानबा हे धन नइये ते,
पंडाल के पाछु म कुकरा चुरथे।

फुहर गाना बजा के नाचथें
नइ लजावँय  एको  रत्ती।
कोनो भगत मन रमी खेलथें
कोनो मन खेलथें काट पत्ती।

'मितान' के बिनती हाबय प्रभू,
देतेव हो थोरुक  धियान।
सबके दुरगुन ल खरहार देतेव,
चलाके स्वच्छता अभियान।

     मनीराम साहू 'मितान'
      कचलोन(सिमगा)

अँग्रेजी के झगरा (हास्य वयंग्य)

जब मैं ट्रेनिंग ले के पहुंचेंव,

बोले बर अँग्रेजी के।

घर मा माढ़गे झगरा, 

देशी अउ बिदेशी।


कहाँ मैं अँग्रेजी सीखे,

पहुचेंव अपन दुवारी।

कहाँ अढ़ी अँगूठा छाप,

मोर सुवारी।


बाहिर ले चिल्लायेंव, 

अरे ओ टेटकी के मदर।

कहिथे भीतरी मा आ,

सब होगे हे गदर फदर।


डेहरी मा माढ़े बाहरी ला देख केहेंव,

वाट इस दीस।

कइथे रँधनी मा आ,

चल हरदी मिरचा पीस।


मैं केहेंव वो माई क्वीन,

बना तो टू कप टी।

कहिस मोलो कपटी काहथस,

तैं कपटी तोर दाई कप टी।


मैं केहेंव वो माई बाबू दाई,

वाट हुआ वाट हुआ।

कइथे येला का होगे वो,

नरियावथे हुवाँ हुवाँ।


मैं केहेव ओ माई गोसाइन,

तुम नइ अन्डर स्टैंड।

कइथे हाँ हाँ तोर तोर रात दिन,

मोटर स्टेंड।


तोर तो गोड़ उठे हे,

मोटर स्टेंड जाये बर।

ओला झाँके ओला ताके,

रँग रँग गोठियाये बर।


मन मा सोचेंव ये अँग्रेजी के झगरा,

बाढ़ही तइसे लागत हे।

सावन मा चिखला कस

मातही तइसे लागत हे।


अँग्रेजी ला छोड़ के मया करत कहेंव,

तोला का होगे बदरा।

मैं तो बने बने गोठियाथँव,

तैं मताथस झगरा।


चिचियाके कहिस,

तैं झगराहा तैं लड़न्का।

मैं सोच के चुप्पे होगेंव कि, 

ये तो महसंग्राम के बजादिस डंका।


अब ओकर मइन्ता जुड़ाइस,

सोंंचेंव फेर कुछ अजमाना चाही।

मोला चढ़े अग्रेजी के नसा

फेर अँग्रेजी मा गोठियाना चाही।


मैं केहेंव वो प्राण प्यारी माई वाइफ,

आई लाइक यू।

पिक्चर देख के उहू सीखगे राहय,

कहिस मोर राजा आई लव यू।


  - मनीराम साहू 'मितान'





 


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