Tuesday, 15 May 2018

ताटंक गीत (राष्ट्र जागरण)

ताटंक गीत

राष्ट जागरण धर्म हमारा, वही निभाने आये हैं।
उठो-उठो ऐ सोने वालों, तुम्हे जगाने आये हैं।

हमको दुश्मन ताक रहा है,छोर पार वो बैठा है।
ललचाया सा उसका मुँह है, देखो कैसे ऐंठा है।
नीयत उसकी ठीक नही है, तुम्हें बताने आये हैं।1।

भीतर भी कुछ बाँट रहे है, जहर शब्द की प्याली में।
छेद बनाते दिखते हैं कुछ,  खाते हैं जिस थाली है।
फन फैलाये पाप कालिया,तुम्हें दिखाने आये हैं।2।

मक्कारो का जोश देश में, बढा दिखाई देता है।
देश द्रोह का पारा भी अब, चढ़ा दिखाई देता हैं।
कलमकार हम देश भक्ति का, पाठ पढ़ाने आये हैं।3।

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