Tuesday, 15 May 2018

सार छंद

मजा उड़ाबो(सार छंद)

सुखवा दुखवा चैतू बुद्धू , चलव चलावत गड्डी।
तरिया जाबो डुबक नहाबो, धर लव कुरता चड्डी।

उथली-उथली खेल छुवउला, करबो मिलके मस्ती।
अबड़ मिठाथे हवय पार मा, खाबो पिकरी गस्ती।

झुलबो जी हम बर्रइया मा, निहल-निहल हे डारा।
कुदबो चभरँग ले पानी मा, पारी पारी झारा।

नँगत खोखमा तरिया पैठू , हेर-हेर के खाबो।
हवय पार मा डुमर घलो जी, खाबो मजा उड़ाबो।

     मनीराम साहू 'मितान'
      कचलोन (सिमगा)

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