किसान
(1)
खूब कमाय किसान सबो पर हासिल तो पीरा बस आथे।
बादर हा बरसै नइ जी बरसै जब वो बिक्टे बरसाथे।
जाय सुखाय बिना जल के सह या बरसा ले वो सर जाथे।
मौसम ठीक रहै त कभू चट कीट पतंगा हा कर जाथे।
(2)
छूटय गा नइ संग कभू करजा रइथे मूड़ी लदकाये।
ले उँन पावयँ तो नइ जी चिरहा पटकू ले काम चलायें।
लाँघन गा रहि जाय घलो उँन भाग म बासी पेज लिखाये।
पालनहार कहायँ भले उँन रोज गरीबी भोग पहायें।
(3)
घूमयँ जी उघरा लइका मन पाँव कहाँ जूता हर होथे।
आड़ किसानन ले बड़का मन स्वारथ रोटी ला बड़ पोथें।
ध्यान कहाँ रइथे ककरो सरकार घलो संसो बिन सोथे।
हार जथें बपुरा मन हा अउ जा तब फाँसी आप अरोथें।
छंदकार- मनीराम साहू 'मितान'
कचलोन (सिमगा )
जिला बलौदाबाजार भाटापारा
छत्तीसगढ़ 493101
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