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आगे अक्ती अब तो देखत, लगगे नावा साल।
धरले राँपा झउँहा भाई, खातू देबो पाल।
हूम-धूप अउ नरियर धरले, धान एक सौ आठ।
बने सुमर के महादेव ला, करबो पूजा-पाठ।
पहिली पुजबो बिघन हरइया, स्वामी गिरिजा लाल।
धरले राँपा झउँहा भाई, खातू देबो पाल।
काँटा खूँटी ला बिन देबो, हमन बाहरा खार।
मुँही-पार ला घलो सजाबो, उहिती परथे नार।
काँद दुबी ला छोल मड़ाबो, करथें बड़ बेहाल।
धरले राँपा झउँहा भाई, खातू देबो पाल।
करबो मुहतुर धर बिजबोनी, जाबो टिकरा खार।
कुत देथे बड़ भाठा-सरना, सुग्घर ओकर डार।
धान हरहुना बों देबो गा, परथे अबड़ दुकाल।
धरले राँपा झउँहा भाई, खातू देबो पाल।
चउमासा मा पेड़ जगाबो, देबो गड्ढा कोड़।
भर देबो गा हमन लेग के, गोबर खातू थोड़।
होथे पेड़ 'मितान' असन गा, परदूसन के काल।
धरले राँपा झउँहा भाई, खातू देबो पाल।
मनीराम साहू 'मितान'
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