नाम- मनीराम साहू 'मितान'
मोबा.- 9826154608
पता- म.नं.153, कर्मचारी कालोनी सिमगा
जिला- बलौदाबाजार-भाटापारा
छत्तीसगढ़ 493101
(1)मानवता
मानवता अब गुम हुई, नही कहीं संस्कार ।
बढ़ा हुआ व्यभिचार है, देखो इस संसार ।
देखो इस संसार, बेटियाँ जातीं मारी।
सम्मुख रक्षक खूब, लुटे हैं अस्मत नारी।
पाल रखे हैं पाप, सोच में है दानवता।
बैठे हैं सब मौन, आसनी है मानवता ।
(2) छाँया
छाँया को है ढूंढता, नही लगाया पेड़ ।
काट दिया निज स्वार्थ में, चला चाल तू भेंड़।
चला चाल तू भेंड़, देखना पछताओगे ।
फँस कर खुद की जाल,हार कर मर जाओगे।
किया उसी में छेद, थाल जिसमें तू खाया।
ऐ पातक इंसान, ढूँढता किस मुँह छाँया।
(3) प्याज
आलू बोले प्याज से, मत खा इतना भाव।
मुझको भाये हैं किलो,तुझको आधा पाव।
तुझको आधा पाव, सदा मैं सब्जी राजा।
लगता हूँ स्वादिष्ट, नही तुझको अन्दाजा ।
खूब उचक हर बार, रुलाता है तू चालू।
देता सबको कष्ट, प्याज से बोले आलू।
(4) माँ बाप
माता लगती बोझ सी,फोकट बूढ़ा बाप।
तरसाते जल अन्न को, करते हैं ये पाप।
करते हैं ये पाप, भूल बैठे हैं निर्लज।
फिरें दिखाते शान, सभी जिम्मे को ये तज।
आएगा वो रोज, करेंगे न्याय विधाता।
कर्म करेंगे याद, बुढ़ापा में पितु माता।
(5) धुआँ
धुआँ-धुआँ सा बस दिखे, नभ में चारों ओर ।
शहर शहर अब गाँव में, इनके हैं बस जोर।
इनके हैं बस जोर, कौन अब रोके इनको।
नही किसी को फिक्र, बढाते देखो जिनको।
कहे मनी कर जोर, प्रदूषण मौत कुआँ है।
सुन लो सभी सुजान, जहर ये धूल धुआँ है।
(6) थैला
थैला रख लें साथ में, जायें जब बाजार।
है सज्जन का काम ये, खुद पर है उपकार।
खुद पर है उपकार, बुरी है झिल्ली पन्नी।
करे लाख नुकसान, नही है दाम चवन्नी।
नही घटेगा शान, काम ना है ये मैला।
जब भी लें सामान, रखें इक कपड़ा थैला।