1)छत्तीसगढ़ महतारी सिंगार
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महतारी छत्तीसगढ़,बंदन हे जाेहार।
पर के तोरे पाँव ला,बरनत हँव सिंगार।
लुगरा हरियर तोर हे,हवय पोलखा लाल।
करिया करिया हे दिखत,कोरे गाँथे बाल।
सुग्घर खोपा तोर वो,गजरा हवस लगाय।
फूल केकती मोंगरा,अड़बड़ के ममहाय।
लुकलुक ले फुल्ली दिखय, फबथे टिकली तोर।
काजर ला आँजे हवस,तैं आँखी के कोर।
मुँहरंगी हाबय लगे,दिखथे सुग्घर ओंठ।
गुरतुर-गुरतुर लागथे,दाई तोरे गोठ।
चमकत हाबय सोनहा, खिनवा बारी कान।
महर-महर ममहात हे,खोंचे दवना पान।
चकचक ले रुपिया दिखय,गर मा सूँता तोर।
सुर्रा तोला बड़ फबय,गूँथे रेशम डोर।
हवय गोदना बाँह मा,पहुँची बहुटा भाय।
चूरी हाबय लाल वो,अँइठी पटा सजाय।
पहिरे मुँदरी नग जड़े,नख मा पालिस लाल।
नव लर करधन तोर वो, दिखथे नँगत कमाल।
टौंड़ा पैरी तोर वो,सबके मन ला भाय।
बाँटे मया दुलार तै,रेंगत फिरत बजाय।
लाली माहुर पाँव मा,चुक ले बिछिया तोर।
रहि जाथवँ देखत चरन, चलथस जब तैं खोर।
2)घरधुन्दिया
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सुरता नन पन खेल के, आथे संगी मोर।
खेलन हम घरघुन्दिया, कुधरइला मा खोर।
कोनो हा लइका बनय, कोनो बनय सियान।
खेलन हम जुरमिल रहन, संगी सबो मितान।
ठट्ठा-ठट्ठा राँध के,पिकरी ला बड़ खान।
सुँतई के बरतन रहय, तारा पीपर पान।
बोइर मोकइया रखे,खोलन हमन दुकान।
पथरा के सिक्का बना,लेवन जी सामान।
फरिया बाँधन मोटरा,पहुना बन के जान।
चुकिया मा पानी मिलय, होवय जी बड़ मान।
साँटी पहिरन साध मा,बमरी फर ला लान।
आवय जी अड़बड़ मजा, गावन जय गंगान।
टूटे टीपा ला बजा,जावन हमन बरात।
नाचन राउत नाच मा, दोहा पारन घात।
3)छत्तीसगढ़ के खेल
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नेती भँवरा नेत के, देवन हमन चलाय।
करय भुन्न के बड़ बजय,घूमय जी रठ खाय।
गिल्ली अउ डंडा धरन, खेलन जा दइहान।
उदकय गिल्ली टिन्ग ले,मारन टोंड़ा तान।
गली खोर मा साँझ के,खेलन अड़बड़ सूर।
ददा कहय तुम जाव झन, एती ओती दूर।
लीम तरी मा झार गा, नोनी मन सकलायँ।
फुगड़ी मातय रोज के, दे बछरू सब गायँ।
चिखला माटी खेल गा, बंगाला हा आय।
बाजय फूट फटाक ले, अड़बड़ मन ला भाय।
रमटोही देवय अबड़, फल्ली मा सुकलाल।
काहय दल्लू दाम दे,बाँचे हाबय पाल।
गड़ी बदन खेलन सबो,छोटे बड़े मिझार।
खो खो दय नँगते मजा,होय जीत या हार।
डंडा पचरंगा अबड़,खेलन चेत लगाय।
उतरन जब हम पेड़ ले,चूहन मजा बताय।
खेलन बाँटी बर तरी, मिलके सबो मितान।
मजा अबड़ के आय जी, खेलन जा दइहान।
दस्सा पंजा खेल मा,मजा अबड़ के आय।
खेलन पीपर के तरी,जम्मो झन सकलाय।
दँउड़ दँउड़ के बड़ छुवन,खेलन नदी पहाड़।
कूद बितंगी खेल मा,झट ले होवन ठाड़।
खेलन चंदा रात मा,बिस अमरित के खेल।
छुकछुक छुकछुक कर चलय, हमरो गाड़ी रेल।
गोंटाअउ भटकउल मा,दँते रहन हम झार।
गारी देवय जब बबा, खेलन तरिया पार।
गरमी के दिन घाम मा,तीपय सबके मूँड़।
फल्ली बिल्लस छोड़ के, खेलन तरिया बूड़।
मनीराम साहू 'मितान'
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