Wednesday, 13 September 2017

किरीट सवैया

किरीट सवैया

हे मधुसूदन हे बृज भूसन ले अँवतार ग ये जग आवव।
बाढ़त हे बड़ पाप इहाँ अब आवव हो पइती ल मड़ावव।
अंत करौ अति के सब माधव भक्तन के अब लाज बचावव।
दुष्टन ला सब मार गिरावव फेर ग धर्म धजा फहरावव।

संतन रूप बनाय ग देखव पाप के बाट धरे इँन हाबयँ।
देखवटी भगवान जपैं पुन दान करैं सब पाप ल छाबयँ।
नाव ल राम रहीम धरैं धन के बल कोड़ नियाव ल दाबयँ।
आवव केशव चाक गदा धर ये मन मानवता ल ग चाबयँ।

दानव गें बन मानव देखव मारय काटयँ बैर ग ठानयँ।
प्रीत मया इँन गा नइ जानयँ थोरुक मा लवठी धर लानयँ।
नीयत मा अब खोंट समा गय माँ बहिनी के नता नइ मानयँ।
आवव हो अब आव सुधारव नीत नियाव कभू नइ जानयँ।

   मनीराम साहू 'मितान'

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