Friday, 22 September 2017

देश के खातिर

@@देश के खातिर@@

दू घंटा लाइन लगायेंव त,
लटपट पहुँचेवँ मशीन तीर।
अइसे लागिस जइसे मोला,
जंग जीतगेंव होगेंवँ बीर।

ए टी एम ले कड़कड़ावत,
निकलिस दू हजार के नोट।
कभू तो देखे नइ राहँव,
कुलकुलायेंवँ मैं हर पोठ।

दू हजार के नोट ल धरके,
पहिली पहुँचेंवँ जी हाट।
लेयेवँ दू किलो पताल,
लाल-लाल बढ़िया छाँट।

नोट मैं हर दे के केहेंवँ,
एले तीस काट ले महतारी।
सब्जी वाली खिसिया कहिस
मार झन तैं हुसियारी।

कइथे तीस रूपिया के ले बर,
देखाथच दू हजार के नोट।
मोर तो बक्का नइ फूटिस,
देखत  राहवँ   बोट-बोट।

कहिस रख दे तैं पताल ल,
लेड़गी समझे हस मोला।
चिल्हर कराय बर मही मिलेंवँ,
रेंग धरके अपन झोला।

आलू वाले घलो होगे,
मोर बर एकदम खार।
कहिस चिल्हर देखा लेले,
फेर आलू छाँट निमार।

धरे दू हजार के नोट ल,
गिजरेंवँ  जम्मो दुकान।
मोर झोला ह रीता रहिगे,
नइ मिलिच काँही सामान।

मैं केहेंवँ कोनो बात नइये,
'मितान' थोकन तैं दुख पाले।
देश के खातिर तहूँ चार दिन,
नून-चटनी म काम चलाले।

   मनीराम साहू'मितान'

अँग्रेजी के झगरा (हास्य वयंग्य)


जब मैं पहुंचेंव ट्रेनिंग ले के,

बोले बर अँग्रेजी के।

मोरे घर मा माढ़गे झगरा, 

देशी अउ बिदेशी।


कहाँ मैं अँग्रेजी सीखे,

पहुचेंव अपन दुवारी।

कहाँ अढ़ी अँगूठा छाप,

मोर सुवारी।


बाहिर ले चिल्लायेंव, 

अरे ओ टेटकी के मदर।

कहिथे भीतरी मा आ,

सब होगे हे गदर फदर।


डेहरी मा माढ़े बाहरी ला देख केहेंव,

वाट इस दीस।

कइथे रँधनी मा आ,

चल हरदी मिरचा पीस।


मैं केहेंव वो माई बाबू दाई,

क्या हुआ क्या हुआ।

कइथे येला का होगे वो,

नरियावथे हुवाँ हुवाँ।


मैं केहेव ओ माई गोसाइन,

तुम नइ अन्डर स्टैंड।

कइथे हाँ हाँ तोर तो रात दिन,

मोटर स्टेंड।


तोर तो गोड़ उठे हे,

मोटर स्टेंड जाये बर।

ओला झाँके ओला ताके,

रँग रँग गोठियाये बर।


मन मा सोचेंव ये अँग्रेजी के झगरा,

बाढ़ही तइसे लागत हे।

सावन मा चिखला कस

मातही तइसे लागत हे।


अँग्रेजी ला छोड़ के मया करत कहेंव,

तोला का होगे बदरा।

मैं तो बने बने गोठियाथँव,

तैं मताथस झगरा।


चिचियाके कहिस,

तैं झगराहा तैं लड़न्का।

मैं सोच के चुप्पे होगेंव कि, 

ये तो महसंग्राम के बजादिस डंका।


अब ओकर मइन्ता जुड़ाइस,

सोंंचेंव फेर कुछ अजमाना चाही।

मोला चढ़े अग्रेजी के नसा

फेर अँग्रेजी मा गोठियाना चाही।


मैं केहेंव वो प्राण प्यारी माई वाइफ,

आई लाइक यू।

पिक्चर देख के उहू सीखगे राहय,

कहिस आई लव यू।


  - मनीराम साहू 'मितान'


कुकुर मन के होरी


बड़े बिहनिया का देखेंव मोर पारा।

कुछ कुकुर आँवारा, कुछ शादीशुदा कुछ कुँवारा।

पीये पाये मस्त खाये भाँग गोली।

जुरिया के निकलिंन खेले बर होली।


कुतवंतिन भउजी ला रस्ता मा पालिंन।

होरी के ओखी मा मिलके गिंधियादिंन।

चिखला ला धरके बरपेली लगावँय।

जेला पावय तेला नँगते कूदावँय।

एक झन मनखे के घेंच ला दाबदिंन।

हाथ गोड़ पेट ला मिलके चाबदिंन।

अड़बड़ मनखे सकलागें, कोनो काहय बइगा घर लेगव कोनो मेकाहारा।

बड़े.......


ड्यूटी मा घूमत थानेदार आइस।

जोरसे चिचियाके जम्मो ला हड़काइस।

संतरी ला बला के हाथ गोड़ ला बाँधदिस।

गाड़ी मा भरके लेगगे, जेल मा धाँधदिस।

जम्मो ककुर मन के,  शुरू होगे हाँव हाँव।

थानेदार बर घलो, करिंन खाँव खाँव।

थानेदार हाय हाय मिलके लगाइँन नारा।

बड़े......


आगे तुरते थानेदार करा ऊपर ले फोन।

थानेदार कहिस बोलत हस कोन।

कहिस नेताजी बोलत हँव, झन कर परसान।

कारवाही करके अपन, झन कर तैं नसकान।

ये दारी के होली मा कानून ला तोड़ दे।

सामने चुनाव हे कुकुर मन ला छोड़ दे।

कहिस धर ले थइली मा केस के जम्मो धारा।

बड़े......

- मनीराम साहू 'मितान'



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